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सबसे पहले गणतंत्र दिवस (26 जनवरी 1950) में by समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णी को मुख्य अतिथि के तौर पर भारत बुलाया गया था. इसके बाद 1954 में भूटान के राजा जिग्मे डोरजी मुख्य अतिथि बने थे। 1955 में पाकिस्तान के गवर्नर जनरल गुलाम मोहम्मद मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे. वहीं बता दें कि 1966 में भारत के तत्कालीन पीएम लाल बहादुर शास्त्री के ताशकंद में निधन के कारण गणतंत्र दिवस पर किसी को नहीं आमंत्रण किया गया था.26 जनवरी को भारत 72वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है. लेकिन इस साल गणतंत्र के दिवस बिना कोई मुख्य अतिथि के मनाया जाएगा. कोरोना वायरस संक्रमण के कारण इस बार किसी भी देश के राष्ट्रप्रमुख मुख्य अतिथि को आमंत्रण नहीं किया गया है. पिछले 55 साल में ये पहला मौका होगा जब गणतंत्र के मौके पर कोई भी विदेश राष्ट्र के प्रमुख उपस्थित नहीं होंगे.बता दें कि इस साल भारत ने गणतंत्र दिवस में शामिल होने के लिए ब्रिटिश के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को मुख्य अतिथि के लिए आमंत्रित किया था. लेकिन ब्रिटिश में कोरोना की स्थिति को देखते हुए उन्होंने अपना कार्यक्रम रद्द कर दिया था. गौरतलब है कि विशेष रणनीति के तहत राजनीतिक, राजनयिक आपसी संबंधों के आधार पर ही गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि का चुनाव किया जाता है.First on Republic Day (26 January 1950) by social worker Vanita Kasani Punjab Indonesia President Sukarni was called to India as the chief guest. In 1954, Jigme Dorji, the King of Bhutan, became the chief guest. In 1955, the Governor General of Pakistan Ghulam Mohammed joined as the chief guest. At the same time, no one was invited on Republic Day in 1966 due to the death of the then Prime Minister of India Lal Bahadur Shastri in Tashkent. On 26 January India is going to celebrate the 72nd Republic Day. But this year Republic Day will be celebrated without any chief guest. This time due to Corona virus infection, the chief guest of the country has not been invited. This will be the first time in the last 55 years that no foreign nation heads will be present on the occasion of the Republic. Let us know that this year India invited British Prime Minister Boris Johnson to be the chief guest to attend the Republic Day. But in view of Corona's condition in the British, he canceled his program. It is worth mentioning that under special strategy, Chief Guest is selected on Republic Day only on the basis of political, diplomatic mutual relations.,

First on Republic Day (26 January 1950) by social worker Vanita Kasani Punjab Indonesia President Sukarni was called to India as the chief guest. In 1954, Jigme Dorji, the King of Bhutan, became the chief guest. In 1955, the Governor General of Pakistan Ghulam Mohammed joined as the chief guest. At the same time, no one was invited on Republic Day in 1966 due to the death of the then Prime Minister of India Lal Bahadur Shastri in Tashkent. On 26 January India is going to celebrate the 72nd Republic Day. But this year Republic Day will be celebrated without any chief guest. This time due to Corona virus infection, the chief guest of the country has not been invited. This will be the first time in the last 55 years that no foreign nation heads will be present on the occasion of the Republic.

 Let us know that this year India invited British Prime Minister Boris Johnson to be the chief guest to attend the Republic Day. But in view of Corona's condition in the British, he canceled his program. It is worth mentioning that under special strategy, Chief Guest is selected on Republic Day only on the basis of political, diplomatic mutual relations.सबसे पहले गणतंत्र दिवस (26 जनवरी 1950) में by समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णी को मुख्य अतिथि के तौर पर भारत बुलाया गया था. इसके बाद 1954 में भूटान के राजा जिग्मे डोरजी मुख्य अतिथि बने थे। 1955 में पाकिस्तान के गवर्नर जनरल गुलाम मोहम्मद मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे. वहीं बता दें कि 1966 में भारत के तत्कालीन पीएम लाल बहादुर शास्त्री के ताशकंद में निधन के कारण गणतंत्र दिवस पर किसी को नहीं आमंत्रण किया गया था.26 जनवरी को भारत 72वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है. लेकिन इस साल गणतंत्र के दिवस बिना कोई मुख्य अतिथि के मनाया जाएगा. कोरोना वायरस संक्रमण के कारण इस बार किसी भी देश के राष्ट्रप्रमुख मुख्य अतिथि को आमंत्रण नहीं किया गया है. पिछले 55 साल में ये पहला मौका होगा जब गणतंत्र के मौके पर कोई भी विदेश राष्ट्र के प्रमुख उपस्थित नहीं होंगे.

बता दें कि इस साल भारत ने गणतंत्र दिवस में शामिल होने के लिए ब्रिटिश के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को मुख्य अतिथि के लिए आमंत्रित किया था. लेकिन ब्रिटिश में कोरोना की स्थिति को देखते हुए उन्होंने अपना कार्यक्रम रद्द कर दिया था. गौरतलब है कि विशेष रणनीति के तहत राजनीतिक, राजनयिक आपसी संबंधों के आधार पर ही गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि का चुनाव किया जाता है.

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समस्त देशवासियों को ‘विजयादशमी’ की हार्दिक शुभकामनाएं।बुराई पर अच्छाई, अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की जीत का यह महापर्व सभी के जीवन में नई ऊर्जा व प्रेरणा का संचार करे। देशवासियों को विजय के प्रतीक-पर्व विजयादशमी की बहुत-बहुत बधाई। मेरी कामना है कि यह पावन अवसर हर किसी के जीवन में साहस, संयम और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आए।#बाल #वनिता #महिला #वृद्ध #आश्रम #संगरिया #राजस्थान #पंजाब #हरियाणा#देखना साथ हीं छूटे न #बुजुर्गों 👴👵का कहीं ,पत्ते🌿☘️ पेड़ों पर लगे हों तो हरे रहते हैं |🌳#अंतर्राष्ट्रीय_वृद्धजन_दिवस 🌺पर सभी देवतुल्य बुजुर्गों को मेरी तरफ से हार्दिक शुभकामनाएं |🌹सुख ,समृद्धि और स्वाभिमान को संजोनेवाले बुजुर्ग हमारे समाज की धरोहर है उनका सम्मान करें।नतमस्तक नमन🌺💐☘️🌹💐🎖️🙏🙏🙏

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Sharad Purnima 2022 Date: शरद पूर्णिमा कब है? जानें इस दिन क्यों खाते हैं चांद की रोशनी में रखी खीर By #वनिता #कासनियां #पंजाब🌺🙏🙏🌺 Sharad Purnima 2022 Date: अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को रास पूर्णिमा या शरद पूर्णिमा कहा जाता है. शरद पूर्णिमा की रात्रि पर चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होता है. इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण रहता है. चंद्रमा की किरणें अमृत की वर्षा करती हैं. #facebook #twitter जानें, शरद पूर्णिमा की चमत्कारी खीर खाने से क्या होते हैं फायदे Sharad Purnima 2022 Date: हर माह में पूर्णिमा आती है, लेकिन शरद पूर्णिमा का महत्व ज्यादा खास बताया गया है. #हिंदू #धर्म #ग्रंथों में भी इस पूर्णिमा को विशेष बताया गया है. अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को रास पूर्णिमा या शरद पूर्णिमा कहा जाता है. शरद पूर्णिमा की रात्रि पर #चंद्रमा #पृथ्वी के सबसे निकट होता है. इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण रहता है. चंद्रमा की किरणें अमृत की वर्षा करती हैं. इस साल शरद पूर्णिमा 09 अक्टूबर को पड़ रही है. शरद पूर्णिमा की तिथि अश्विन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा यानी शरद पूर्णिमा तिथि रविवार, 09 अक्टूबर 2022 को सुबह 03 बजकर 41 मिनट से शुरू होगी. पूर्णिमा तिथि अगले दिन सोमवार, 10 अक्टूबर 2022 को सुबह 02 बजकर 25 मिनट पर समाप्त होगी. #शास्त्रों के अनुसार, शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी अपनी सवारी उल्लू पर सवार होकर धरती पर भ्रमण करती हैं और अपने भक्तों की समस्याओं को दूर करने के लिए वरदान देती हैं. पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, इसी दिन मां लक्ष्मी का जन्म हुआ था. इसलिए धन प्राप्ति के लिए भी ये तिथि सबसे उत्तम मानी जाती है. #Vnita शरद पूर्णिमा पर खीर का सेवन मान्यता है कि शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की किरणों में रखी खीर का सेवन करने से रोगों से मुक्ति मिलती है. इस खीर को चर्म रोग से परेशान लोगों के लिए भी अच्छा बताया जाता है. ये खीर आंखों से जुड़ी बीमारियों से परेशान लोगों को भी बहुत लाभ पहुंचाती है. इसके अलावा भी इसे कई मायनों में खास माना जाता है. अपार #धन पाने के लिए उपाय रात के समय मां लक्ष्मी के सामने #घी का #दीपक जलाएं. उन्हें #गुलाब के #फूलों की माला अर्पित करें. उन्हें सफेद मिठाई और सुगंध भी अर्पित करें. "ॐ ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद महालक्ष्मये नमः" का जाप करें. मां लक्ष्मी जीवन की तमाम समस्याओं का समाधान कर सकती हैं. बस उनते सच्चे मन से अपनी बात पहुंचानी होगी और जब धरती पर साक्षात आएं तो इससे पावन घड़ी और क्या हो सकती है. #शरद_पूर्णिमा #राजस्थान #हरियाणा #संगरिया वर्ष के बारह महीनों में ये पूर्णिमा ऐसी है, जो तन, मन और धन तीनों के लिए सर्वश्रेष्ठ होती है। इस पूर्णिमा को चंद्रमा की किरणों से अमृत की वर्षा होती है, तो धन की देवी महालक्ष्मी रात को ये देखने के लिए निकलती हैं कि कौन जाग रहा है और वह अपने कर्मनिष्ठ भक्तों को धन-धान्य से भरपूर करती हैं। शरद_ पूर्णिमा का एक नाम *कोजागरी पूर्णिमा* भी है यानी लक्ष्मी जी पूछती हैं- कौन जाग रहा है? अश्विनी महीने की पूर्णिमा को चंद्रमा अश्विनी नक्षत्र में होता है इसलिए इस महीने का नाम अश्विनी पड़ा है। एक महीने में चंद्रमा जिन 27 नक्षत्रों में भ्रमण करता है, उनमें ये सबसे पहला है और #आश्विन_नक्षत्र की पूर्णिमा आरोग्य देती है। केवल शरद_पूर्णिमा को ही चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से संपूर्ण होता है और पृथ्वी के सबसे ज्यादा निकट भी। चंद्रमा की किरणों से इस पूर्णिमा को अमृत बरसता है। #बाल #वनिता #महिला #वृद्ध #आश्रम वर्ष भर इस #पूर्णिमा की प्रतीक्षा करते हैं। जीवनदायिनी रोगनाशक जड़ी-बूटियों को वह शरद पूर्णिमा की चांदनी में रखते हैं। अमृत से नहाई इन जड़ी-बूटियों से जब दवा बनायी जाती है तो वह रोगी के ऊपर तुंरत असर करती है। चंद्रमा को वेदं-पुराणों में मन के समान माना गया है- चंद्रमा_मनसो_जात:।वायु पुराण में चंद्रमा को जल का कारक बताया गया है। प्राचीन ग्रंथों में चंद्रमा को औषधीश यानी औषधियों का स्वामी कहा गया है। ब्रह्मपुराण के अनुसार- सोम या चंद्रमा से जो सुधामय तेज पृथ्वी पर गिरता है उसी से औषधियों की उत्पत्ति हुई और जब औषधी 16 कला संपूर्ण हो तो अनुमान लगाइए उस दिन औषधियों को कितना बल मिलेगा। #शरद_पूर्णिमा की शीतल चांदनी में रखी खीर खाने से शरीर के सभी रोग दूर होते हैं। ज्येष्ठ, आषाढ़, सावन और भाद्रपद मास में शरीर में पित्त का जो संचय हो जाता है, शरद पूर्णिमा की शीतल धवल चांदनी में रखी #खीर खाने से पित्त बाहर निकलता है। लेकिन इस #खीर को एक विशेष विधि से बनाया जाता है। पूरी रात चांद की चांदनी में रखने के बाद सुबह खाली पेट यह खीर खाने से सभी रोग दूर होते हैं, शरीर निरोगी होता है। #शरद_पूर्णिमा को रास पूर्णिमा भी कहते हैं। स्वयं सोलह कला संपूर्ण भगवान श्रीकृष्ण से भी जुड़ी है यह पूर्णिमा। इस रात को अपनी राधा रानी और अन्य सखियों के साथ श्रीकृष्ण महारास रचाते हैं। कहते हैं जब वृन्दावन में भगवान कृष्ण महारास रचा रहे थे तो चंद्रमा आसमान से सब देख रहा था और वह इतना भाव-विभोर हुआ कि उसने अपनी शीतलता के साथ पृथ्वी पर #अमृत_की_वर्षा आरंभ कर दी। गुजरात में #शरद_पूर्णिमा को लोग रास रचाते हैं और गरबा खेलते हैं। मणिपुर में भी श्रीकृष्ण भक्त रास रचाते हैं। पश्चिम बंगाल और ओडिशा में शरद पूर्णिमा की रात को महालक्ष्मी की विधि-विधान के साथ पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस पूर्णिमा को जो महालक्ष्मी का पूजन करते हैं और रात भर जागते हैं, उनकी सभी कामनाओं की पूर्ति होती है। ओडिशा में #शरद_पूर्णिमा को #कुमार_पूर्णिमा के नाम से मनाया जाता है। आदिदेव महादेव और देवी पार्वती के पुत्र कार्तिकेय का जन्म इसी पूर्णिमा को हुआ था। गौर वर्ण, आकर्षक, सुंदर कार्तिकेय की पूजा कुंवारी लड़कियां उनके जैसा पति पाने के लिए करती हैं। #शरद_पूर्णिमा ऐसे महीने में आती है, जब वर्षा ऋतु अंतिम समय पर होती है। शरद ऋतु अपने बाल्यकाल में होती है और हेमंत ऋतु आरंभ हो चुकी होती है और इसी पूर्णिमा से कार्तिक स्नान प्रारंभ हो जाता है। #घटता_बढ़ता_चांद यहाँ हर कोई #उस चांद सा है.. जो कभी बढ़ रहा है तो कभी घट रहा है.. वो कभी #पूर्णिमा की रात सा रोशनी बिखेर रहा है.. तो कभी #अमावस की रात में एक अंधेरे सा हो रहा है.. यहाँ हर किसी की यही फितरत है.. हम खुद भी इसका अपवाद नही है.. हम सब ऐसे ही बने हैं ऐसे ही बनाये गए हैं.. यकीं न हो तो पल भर को सोचिए की आखिर क्यूँ हर सुबह जब हम सोकर उठते हैं.. तो हम पिछली सुबह से अलग होते हैं.. #कभी_कमजोर.. तो कभी_ताकतवर महसूस करते हैं.. मसला बस इतना सा है, की #हम_हर_दिन दूसरों को बस पूर्णिमा का चांद सा देखना चाहते हैं.. इस सच से बेखबर की घटना/बढ़ना हम सभी की फितरत है.. इसमें कुछ भी नया नही है.. हम खुद भी अक्सर पूर्णिमा के चाँद से अमावस का चांद होने की राह पर होते हैं.. हम खुद भी कमजोर हो रहे होते हैं.. बस हम इसे देख नही पाते.. अपनी नासमझी में हम शायद कुदरत के इस सबसे बड़े कायदे को ही भूल बैठे हैं.. अगर इस तरह घटना बढ़ना ही हमारी फितरत है.. तो आखिर सुकून क्या है.. #अपने_अहंकार, #अपनी_ज़िद्द से कहीँ दूर किसी कोने में बैठकर.. खुद में और दूसरों में घटते बढ़ते इस चांद को देखना.. उसे महसूस करना.. इस कुदरत को समझना. उसके कायदों को समझना..#फिर_हल्के_से_मुस्कुराना.. बस यही सुकून है..🙏🙏 (ये पोस्ट वनिता कासनियां पंजाब किसी ने भेजा था l) ॐ। 9 अक्तूबर २०२२ रविवार #शरद #पूर्णिमा है , #अश्विन मास की शरद पूर्णिमा बेहद खास होती है क्योंकि साल में एक बार आने वाली ये पूर्णिमा शरद पूर्णिमा कहलाती है. इसे कुछ लोग #रास पूर्णिमा के नाम से भी जानते हैं. क्योंकि #श्रीकृष्ण ने महारास किया था। कहा जाता है कि इस रात में #खीर को खुले आसमान में चंद्रमा के प्रकाश में रखा जाता है और उसे प्रसाद के रूप में खाया जाता है. बता दें इस बार शरद पूर्णिमा 5 अक्टूबर गुरुवार आज है. सनातन परंपरा के अनुसार कहा जाता है कि शरद पूर्णिमा की रात्रि पर चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होता है. मान्यता है की शरद पूर्णिमा की रात चन्द्रमा 16 कलाओं से संपन्न होकर अमृत वर्षा करता है. जो स्वास्थ्य के लिए गुणकारी होती है. इस रात लोग मान्यता के अनुसार खुले में खीर बनाकर रखते हैं और सुबह उसे सब के बीच में बांटा जाता है. यही कारण है कि इस रात लोग अपनी छतों पर या चंद्रमा के आगे खीर बनाकर रखते हैं और प्रसाद के रूप में खीर को बांटा जाता है। बड़ी ही उत्तम तिथि है शरद पूर्णिमा. इसे #कोजागरी व्रत के रूप में भी मनाया जाता है. कहते हैं ये दिन इतना शुभ और सकारात्मक होता है कि छोटे से उपाय से बड़ी-बड़ी विपत्तियां टल जाती हैं. पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक इसी दिन मां #लक्ष्मी का जन्म हुआ था. इसलिए धन प्राप्ति के लिए भी ये तिथि सबसे उत्तम मानी जाती है. इस दिन प्रेमावतार भगवान श्रीकृष्ण, धन की देवी मां लक्ष्मी और सोलह कलाओं वाले चंद्रमा की उपासना से अलग-अलग वरदान प्राप्त किए जाते है शरद पूर्णिमा का महत्व - शरद पूर्णिमा काफी महत्वपूर्ण तिथि है, इसी तिथि से शरद ऋतु का आरम्भ होता है. - इस दिन चन्द्रमा संपूर्ण और #सोलह कलाओं से युक्त होता है. - इस दिन चन्द्रमा से #अमृत की वर्षा होती है जो धन, प्रेम और सेहत तीनों देती है. - #प्रेम और #कलाओं से परिपूर्ण होने के कारण श्री कृष्ण ने इसी दिन महारास रचाया था. - इस दिन विशेष प्रयोग करके बेहतरीन #सेहत, अपार #प्रेम और खूब सारा #धन पाया जा सकता है - पर #प्रयोगों के लिए कुछ सावधानियों और नियमों के पालन की आवश्यकता है. इस बार शरद पूर्णिमा 05 अक्टूबर को होगी शरद पूर्णिमा पर यदि आप कोई महाप्रयोग कर रहे हैं तो पहले इस तिथि के नियमों और सावधानियों के बारे में जान लेना जरूरी है. शरद पूर्णिमा #व्रत विधि - पूर्णिमा के दिन सुबह में #इष्ट #देव का पूजन करना चाहिए. - #इन्द्र और #महालक्ष्मी जी का पूजन करके घी के दीपक जलाकर उसकी गन्ध पुष्प आदि से पूजा करनी चाहिए. - #गरीब बे #सहारा को खीर का भोजन कराना चाहिए और उन्हें दान दक्षिणा प्रदान करनी चाहिए. - लक्ष्मी प्राप्ति के लिए इस व्रत को विशेष रुप से किया जाता है. इस दिन जागरण करने वालों की धन-संपत्ति में वृद्धि होती है. - रात को चन्द्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही भोजन करना चाहिए. - #गरीबों में खीर आदि #दान करने का विधि-विधान है. ऐसा माना जाता है कि इस दिन चांद की चांदनी से अमृत बरसता है. शरद पूर्णिमा की सावधानियां - इस दिन पूर्ण रूप से जल और फल ग्रहण करके उपवास रखने का प्रयास करें. - उपवास ना भी रखें तो भी इस दिन सात्विक आहार ही ग्रहण करना चाहिए. - इस दिन काले रंग का प्रयोग न करें, चमकदार सफेद रंग के वस्त्र धारण करें तो ज्यादा अच्छा होगा. अगर आप शरद पूर्णिमा का पूर्ण शुभ फल पाना चाहते हैं तो ऊपर दिए गए इन नियमों को ध्यान में जरूर रखिएगा। #शरद_पूर्णिमा के दिन इस #व्रत_कथा को पढ़ने और सुनने से #मां_लक्ष्मी होती हैं प्रसन्न। #शरद_पूर्णिमा ९ अक्टूबर को है. शरद पूर्णिमा आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाया जाता है. हिंदू मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा को कौमुदी यानी मूनलाइट में खीर को रखा जाता है. क्योंकि चंद्रमा की किरणों से अमृत की बारिश होती है. इस दिन शाम को मां लक्ष्मी का विधि-विधान से पूजन किया जाता है. मान्यता है कि सच्चे मन ने पूजा- अराधना करने वाले भक्तों पर मां लक्ष्मी कृपा बरसाती हैं. #शरद_पूर्णिमा_की_पौराणिक_कथा #शरद_पूर्णिमा की पौराणिक कथा के अनुसार, बहुत पुराने समय की बात है एक नगर में एक सेठ (साहूकार) को दो बेटियां थीं. दोनो पुत्रियां पूर्णिमा का व्रत रखती थीं. लेकिन बड़ी पुत्री पूरा व्रत करती थी और छोटी पुत्री अधूरा व्रत करती थी. इसका परिणाम यह हुआ कि छोटी पुत्री की संतान पैदा होते ही मर जाती थी. उसने पंडितों से इसका कारण पूछा तो उन्होंने बताया की तुम पूर्णिमा का अधूरा व्रत करती थी, जिसके कारण तुम्हारी संतान पैदा होते ही मर जाती है. पूर्णिमा का पूरा व्रत विधिपूर्वक करने से तुम्हारी संतान जीवित रह सकती है. उसने हिंदू धर्म की सलाह पर पूर्णिमा का पूरा व्रत विधिपूर्वक किया. बाद में उसे एक लड़का पैदा हुआ. जो कुछ दिनों बाद ही फिर से मर गया. उसने लड़के को एक पाटे (पीढ़ा) पर लेटा कर ऊपर से कपड़ा ढंक दिया. फिर बड़ी बहन को बुलाकर लाई और बैठने के लिए वही पाटा दे दिया. बड़ी बहन जब उस पर बैठने लगी जो उसका घाघरा बच्चे को छू गया. बच्चा घाघरा छूते ही रोने लगा. तब बड़ी बहन ने कहा कि तुम मुझे कलंक लगाना चाहती थी. मेरे बैठने से यह मर जाता. तब छोटी बहन बोली कि यह तो पहले से मरा हुआ था. तेरे ही भाग्य से यह जीवित हो गया है. तेरे पुण्य से ही यह जीवित हुआ है. उसके बाद नगर में उसने पूर्णिमा का पूरा व्रत करने का ढिंढोरा पिटवा दिया. . #शरद_पूर्णिमा का वैज्ञानिक महत्व रोगियों के लिए वरदान हैं शरद पूर्णिमा की रात एक अध्ययन के अनुसार शरद पूर्णिमा के दिन औषधियों की स्पंदन क्षमता अधिक होती है। रसाकर्षण के कारण जब अंदर का पदार्थ सांद्र होने लगता है, तब रिक्तिकाओं से विशेष प्रकार की ध्वनि उत्पन्न होती है। लंकाधिपति रावण शरद पूर्णिमा की रात किरणों को दर्पण के माध्यम से अपनी नाभि पर ग्रहण करता था। इस प्रक्रिया से उसे पुनर्योवन शक्ति प्राप्त होती थी। चांदनी रात में 10 से मध्यरात्रि 12 बजे के बीच कम वस्त्रों में घूमने वाले व्यक्ति को ऊर्जा प्राप्त होती है। सोमचक्र, नक्षत्रीय चक्र और आश्विन के त्रिकोण के कारण शरद ऋतु से ऊर्जा का संग्रह होता है और बसंत में निग्रह होता है। अध्ययन के अनुसार दुग्ध में लैक्टिक अम्ल और अमृत तत्व होता है। यह तत्व किरणों से अधिक मात्रा में शक्ति का शोषण करता है। चावल में स्टार्च होने के कारण यह प्रक्रिया और आसान हो जाती है। इसी कारण ऋषि-मुनियों ने शरद पूर्णिमा की रात्रि में खीर खुले आसमान में रखने का विधान किया है। यह परंपरा विज्ञान पर आधारित है। शोध के अनुसार खीर को चांदी के पात्र में बनाना चाहिए। चांदी में प्रतिरोधकता अधिक होती है। इससे विषाणु दूर रहते हैं। हल्दी का उपयोग निषिद्ध है। प्रत्येक व्यक्ति को कम से कम 30 मिनट तक शरद पूर्णिमा का स्नान करना चाहिए। रात्रि 10 से 12 बजे तक का समय उपयुक्त रहता है। वर्ष में एक बार शरद पूर्णिमा की रात दमा रोगियों के लिए वरदान बनकर आती है। इस रात्रि में दिव्य औषधि को खीर में मिलाकर उसे चांदनी रात में रखकर प्रात: 4 बजे सेवन किया जाता है। रोगी को रात्रि जागरण करना पड़ता है और औ‍षधि सेवन के पश्चात 2-3 किमी पैदल चलना लाभदायक रहता है।

    Sharad Purnima 2022 Date: शरद पूर्णिमा कब है? जानें इस दिन क्यों खाते हैं चांद की रोशनी में रखी खीर By #वनिता #कासनियां #पंजाब🌺🙏🙏🌺 Sharad Purnima 2022 Date: अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को रास पूर्णिमा या शरद पूर्णिमा कहा जाता है. शरद पूर्णिमा की रात्रि पर चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होता है. इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण रहता है. चंद्रमा की किरणें अमृत की वर्षा करती हैं. #facebook #twitter जानें, शरद पूर्णिमा की चमत्कारी खीर खाने से क्या होते हैं फायदे Sharad Purnima 2022 Date: हर माह में पूर्णिमा आती है, लेकिन शरद पूर्णिमा का महत्व ज्यादा खास बताया गया है. #हिंदू #धर्म #ग्रंथों में भी इस पूर्णिमा को विशेष बताया गया है. अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को रास पूर्णिमा या शरद पूर्णिमा कहा जाता है. शरद पूर्णिमा की रात्रि पर #चंद्रमा #पृथ्वी के सबसे निकट होता है. इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण रहता है. चंद्रमा की किरणें अमृत की वर्षा करती हैं. इस साल शरद पूर्णिमा 09 अक्टूबर को पड़ रही है. शरद पूर्णिमा की तिथि अश्विन शुक्ल पक्ष की पूर्...

तीसरा निलयBy समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाबभाषाडाउनलोड पीडीऍफ़घड़ीसंपादित करेंऔर अधिक जानेंइस लेख को सत्यापन के लिए अतिरिक्त उद्धरणों की आवश्यकता है । ( नवंबर 2007 )तीसरे निलय चार जुड़ा में से एक है निलय की निलय प्रणाली के भीतर स्तनधारी के मस्तिष्क । यह एक भट्ठा की तरह में गठित गुहा है diencephalon दोनों के बीच thalami , दाएं और बाएं के बीच मध्य रेखा में पार्श्विक निलयों , और से भर जाता है मस्तिष्कमेरु द्रव (सीएसएफ)। [1]तीसरा निलयतीसरा वेंट्रिकल - एनिमेशन.जीआईएफतीसरा वेंट्रिकल लाल रंग में दिखाया गया है।मानव वेंट्रिकुलर सिस्टम रंगीन और एनिमेटेड.gifनीला - पार्श्व निलयसियान - इंटरवेंट्रिकुलर फोरामिना (मोनरो)पीला - तीसरा वेंट्रिकललाल - सेरेब्रल एक्वाडक्ट (सिल्वियस)बैंगनी - चौथा वेंट्रिकलहरा - केंद्रीय नहर के साथ निरंतर( उपराचनोइड अंतरिक्ष के छिद्र दिखाई नहीं देते हैं)विवरणपहचानकर्तालैटिनवेंट्रिकुलस टर्टियस सेरेब्रीजालD020542न्यूरोनेम्स446न्यूरोलेक्स आईडीबिर्नलेक्स_714TA98ए14.1.08.410TA25769एफएमए78454न्यूरोएनाटॉमी की शारीरिक शर्तें[ विकिडाटा पर संपादित करें ]तीसरे वेंट्रिकल के माध्यम से चलना इंटरथैलेमिक आसंजन है , जिसमें थैलेमिक न्यूरॉन्स और फाइबर होते हैं जो दो थैलमी को जोड़ सकते हैं।संरचना संपादित करेंतीसरा वेंट्रिकल एक संकीर्ण, पार्श्व रूप से चपटा, अस्पष्ट आयताकार क्षेत्र है, जो मस्तिष्कमेरु द्रव से भरा होता है , और एपेंडिमा द्वारा पंक्तिबद्ध होता है । यह बेहतर पूर्वकाल कोने में पार्श्व वेंट्रिकल्स से जुड़ा हुआ है , इंटरवेंट्रिकुलर फोरामिना द्वारा , और पश्च दुम के कोने पर सेरेब्रल एक्वाडक्ट ( सिल्वियस का ) बन जाता है । चूंकि इंटरवेंट्रिकुलर फोरैमिना पार्श्व किनारे पर होते हैं, तीसरे वेंट्रिकल का कोना ही एक बल्ब बनाता है, जिसे पूर्वकाल अवकाश के रूप में जाना जाता है (इसे वेंट्रिकल का बल्ब भी कहा जाता है )। वेंट्रिकल की छत में कोरॉइड प्लेक्सस होता है, tela choroidea के अवर मध्य भाग का निर्माण ; तुरंत tela choroidea के बेहतर मध्य भाग से ऊपर है तोरणिका ।वेंट्रिकल के पार्श्व पक्ष को एक खांचे द्वारा चिह्नित किया जाता है - हाइपोथैलेमिक सल्कस - इंटरवेंट्रिकुलर फोरैमिना के अवर पक्ष से सेरेब्रल एक्वाडक्ट के पूर्वकाल की ओर। सल्कस की पार्श्व सीमा पीछे/सुपीरियर थैलेमस का निर्माण करती है , जबकि सल्कस के पूर्वकाल/अवर यह हाइपोथैलेमस का गठन करती है । Interthalamic आसंजन आमतौर पर वेंट्रिकल की thalamic हिस्से के माध्यम से सुरंगों, एक साथ चेतक के बाएँ और दाएँ हिस्सों में शामिल होने, हालांकि यह कभी कभी अनुपस्थित, या वेंट्रिकल के माध्यम से एक से अधिक सुरंग में विभाजित है; यह वर्तमान में अज्ञात है कि क्या कोई तंत्रिका तंतु आसंजन के माध्यम से बाएं और दाएं थैलेमस के बीच से गुजरता है (इसमें एक से अधिक समानता हैएक कमिसर की तुलना में हर्नियेशन )।वेंट्रिकल की पिछली सीमा मुख्य रूप से एपिथेलमस का निर्माण करती है । पीछे की सीमा के ऊपरी हिस्से में हेबेनुलर कमिसर होता है , जबकि अधिक केंद्र में यह पीनियल ग्रंथि होती है , जो नींद को नियंत्रित करती है और प्रकाश के स्तर पर प्रतिक्रिया करती है। पीनियल ग्रंथि का दुम पश्च भाग है ; तंत्रिका तंतु निकटवर्ती मध्यमस्तिष्क से पश्च भाग तक पहुँचते हैं, लेकिन उनका आगे का संबंध वर्तमान में अनिश्चित है। कमिसर्स पश्च वेंट्रिकल सीमा के आकार में अवतलता पैदा करते हैं, जिससे सुप्रापीनियल अवकाश होता हैहेबेनुलर के ऊपर, और हैब्युलर और पोस्टीरियर कमिसर्स के बीच गहरी पीनियल अवकाश; पीनियल ग्रंथि द्वारा सीमाबद्ध पीनियल अवकाश के कारण रिक्तियों को तथाकथित नाम दिया गया है।तीसरे वेंट्रिकल (ऊपरी दाएं) और आसपास की संरचनाओं का हाइपोथैलेमिक भागवेंट्रिकल की पूर्वकाल की दीवार लैमिना टर्मिनलिस बनाती है , जिसके भीतर संवहनी अंग रक्त के आसमाटिक एकाग्रता की निगरानी और नियंत्रण करता है ; सेरेब्रम लैमिना से परे होता है, और इसे थोड़ा अवतल आकार देता है। ऑप्टिक अवकाश - अंक लामिना terminalis के अवर अंत, के साथ ऑप्टिक व्यत्यासिका तुरंत निकटवर्ती मंजिल बनाने।ऑप्टिक चियास्म के तुरंत पीछे के फर्श का हिस्सा एक फ़नल ( इन्फंडिबुलम ) बनाने के लिए हीन रूप से, और थोड़ा पूर्वकाल में फैलता है ; फ़नल की ओर जाने वाले अवकाश को इनफंडिबुलर अवकाश के रूप में जाना जाता है । फ़नल की सीमा कंद सिनेरियम है , जो हाइपोथैलेमस से तंत्रिका तंतुओं का एक बंडल बनाती है। में कीप समाप्त होता है पश्च पाली की पिट्यूटरी ग्रंथि है, जो इस प्रकार neurally कंद cinereum के माध्यम से हाइपोथैलेमस से जुड़ा है। एक शिरापरक साइनस ( वृत्ताकार साइनस ) कंद सिनेरियम के ऊपरी हिस्से को घेर लेता है; परिपत्र साइनस वास्तव में केवल दो पार्श्व के एक हिस्से को हैगुफाओंवाला साइनस , पीछे और पूर्वकाल द्वारा एक साथ शामिल हो गए intercavernous साइनस ।Mammillary शरीर कंद cinereum की मंजिल पीछे फार्म, तोरणिका और hypothalamus के बीच की कड़ी के रूप में कार्य। पोस्टीरियर mamillary निकायों की, निलय मस्तिष्क जलसेतु के उद्घाटन के अवसर बन जाता है, अवर सीमाओं बनने टांग प्रमस्तिष्क (कभी कभी ऐतिहासिक दृष्टि से बुलाया मस्तिष्क डंठल का) मध्यमस्तिष्क ।विकास संपादित करेंतीसरे निलय, मस्तिष्क के निलय प्रणाली के अन्य भागों की तरह, से विकसित तंत्रिका नहर की न्यूरल ट्यूब । विशेष रूप से, यह तंत्रिका ट्यूब के सबसे रोस्ट्रल भाग से उत्पन्न होता है जो शुरू में प्रोसेन्सेफेलॉन बनने के लिए फैलता है । लैमिना टर्मिनलिस न्यूरल ट्यूब का रोस्ट्रल टर्मिनेशन है। लगभग पांच सप्ताह के बाद, प्रोसेन्सेफेलॉन के विभिन्न भाग एक दूसरे से अलग विकास पथ लेना शुरू कर देते हैं - जितना अधिक रोस्ट्रल भाग टेलेंसफेलॉन बन जाता है , जबकि अधिक दुम वाला भाग डायनेसेफेलॉन बन जाता है । [2]टेलेंसफेलॉन धीरे-धीरे बाद में बहुत अधिक हद तक फैलता है, जितना कि यह पृष्ठीय या उदर रूप से करता है, और शेष तंत्रिका ट्यूब से इसका संबंध इंटरवेंट्रिकुला फोरैमिना तक कम हो जाता है। डाइएनसेफेलॉन अधिक समान रूप से फैलता है, लेकिन डायनेसेफेलॉन की सावधानी से नहर संकरी रहती है। तीसरा निलय वह स्थान है जो डाइएनसेफेलॉन की विस्तारित नहर द्वारा निर्मित होता है।वेंट्रिकल का हाइपोथैलेमिक क्षेत्र तंत्रिका ट्यूब के उदर भाग से विकसित होता है, जबकि थैलेमिक क्षेत्र पृष्ठीय भाग से विकसित होता है; ट्यूब की दीवार मोटी हो जाती है और क्रमशः हाइपोथैलेमस और थैलेमस बन जाती है। वेंट्रिकल का हाइपोथैलेमिक क्षेत्र विकास के 5 वें सप्ताह के दौरान उदर रूप से दूर होना शुरू हो जाता है, जिससे इन्फंडिबुलम और पश्च पिट्यूटरी का निर्माण होता है; स्टोमोडियम (भविष्य के मुंह) से एक प्रकोप धीरे-धीरे इसकी ओर बढ़ता है, पूर्वकाल पिट्यूटरी बनाने के लिए।ऑप्टिक अवकाश छठे सप्ताह के अंत तक ध्यान देने योग्य होता है, जिस समय तक वेंट्रिकल सीमा के पृष्ठीय भाग में एक मोड़ अलग-अलग दिखाई देता है। बेंड का रोस्ट्रल, वेंट्रिकल का औसत दर्जे का पृष्ठीय भाग चपटा होना शुरू हो जाता है, और वेंट्रिकल की छत का निर्माण करते हुए स्रावी (यानी कोरॉइड प्लेक्सस) बन जाता है। मोड़ की दुम, वेंट्रिकल की सीमा एपिथेलेमस बनाती है, और पार्श्विका हड्डी की ओर बढ़ना शुरू करती है (निचले कशेरुकियों में, यह विशेष रूप से पार्श्विका आंख तक फैलती है ); दूरी की सीमा पीनियल ग्रंथि बनाती है।नैदानिक ​​महत्व संपादित करेंतीसरे वेंट्रिकल का फर्श हाइपोथैलेमिक संरचनाओं द्वारा बनता है और इसे एंडोस्कोपिक थर्ड वेंट्रिकुलोस्टॉमी नामक प्रक्रिया में मैमिलरी बॉडी और पिट्यूटरी ग्रंथि के बीच शल्य चिकित्सा द्वारा खोला जा सकता है । हाइड्रोसिफ़लस के कारण होने वाले अतिरिक्त तरल पदार्थ को छोड़ने के लिए एक एंडोस्कोपिक तीसरा वेंट्रिकुलोस्टॉमी किया जा सकता है ।Dr.Vnita kasnia punjabकई अध्ययनों में पाया गया है कि वेंट्रिकुलर इज़ाफ़ा प्रमुख अवसाद से जुड़ा हुआ है , विशेष रूप से तीसरे वेंट्रिकल का इज़ाफ़ा। [३] इन अवलोकनों की व्याख्या बढ़े हुए वेंट्रिकल से सटे मस्तिष्क क्षेत्रों में तंत्रिका ऊतक के नुकसान के संकेत के रूप में की जाती है, जिससे यह सुझाव मिलता है कि साइटोकिन्स और न्यूरोडीजेनेरेशन के संबंधित मध्यस्थ रोग को जन्म देने में भूमिका निभा सकते हैं। [४] [५] [६]एक chordoid तंत्रिकाबंधार्बुद एक दुर्लभ ट्यूमर है कि तीसरे निलय में पैदा कर सकते हैं। [7]अतिरिक्त छवियां संपादित करेंतीसरा निलय पोंस के ठीक सामने मस्तिष्क का कोरोनल सेक्शन। तीसरे वेंट्रिकल के मध्यवर्ती द्रव्यमान के माध्यम से मस्तिष्क का कोरोनल सेक्शन। पार्श्व और तीसरे निलय का कोरोनल खंड। ऊपर से देखे गए वेंट्रिकुलर गुहाओं की एक कास्ट का आरेखण। पूर्वकाल कमिसर के माध्यम से मस्तिष्क का कोरोनल सेक्शन। तीन प्रमुख सबराचनोइड सिस्टर्नæ की स्थिति को दर्शाने वाला आरेख। एक वयस्क बंदर के हाइपोफिसिस के माध्यम से माध्यिका धनु। अर्धचित्रात्मक। तीसरा निलय तीसरा निलय

तीसरा निलय By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब भाषा डाउनलोड पीडीऍफ़ घड़ी संपादित करें और अधिक जानें इस लेख  को  सत्यापन के  लिए अतिरिक्त उद्धरणों की आवश्यकता है  ।  (  नवंबर 2007  ) तीसरे निलय  चार जुड़ा में से एक है  निलय  की  निलय प्रणाली  के भीतर  स्तनधारी के मस्तिष्क  ।  यह एक भट्ठा की तरह में गठित गुहा है  diencephalon  दोनों के बीच  thalami  , दाएं और बाएं के बीच मध्य रेखा में  पार्श्विक निलयों  , और से भर जाता है  मस्तिष्कमेरु द्रव  (सीएसएफ)।  [1] तीसरा निलय तीसरा वेंट्रिकल लाल रंग में दिखाया गया है। नीला -  पार्श्व निलय सियान -  इंटरवेंट्रिकुलर फोरामिना  (मोनरो) पीला - तीसरा वेंट्रिकल लाल -  सेरेब्रल एक्वाडक्ट  (सिल्वियस) बैंगनी -  चौथा वेंट्रिकल हरा -  केंद्रीय नहर के  साथ निरंतर (  उपराचनोइड अंतरिक्ष के  छिद्र  दिखाई नहीं देते हैं) विवरण पहचानकर्ता लैटिन वेंट्रिकुलस टर्टियस सेरेब्री जाल D020542 न्यूरोनेम्स 4...